प्लास्टिक से दूरी, धरती सरंक्षण के लिए जरूरी, एक्सपो मार्ट में बोले पीएम मोदी

न्यूज डेस्क। भारत में धरती को एक पवित्र स्थान दिया गया है, भारतीय संस्कृति में भूमि को माता माना जाता है। हर भारतीय प्रातः उठने के बाद धरती को नमन करके दिन की शुरुआत करता हैं। भारत के लोग प्रातःकाल धरती पर पैर रखने से पहले ‘समुद्र वसने देवी पर्वतस्तन मंडले, विष्णु पत्नी नमस्तुभ्यम्, पाद स्पर्श क्षमस्वमे‘ की प्रार्थना करते हैं। ये बात प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कही। पीएम मोदी सोमवार को ग्रेटर नोएडा के एक्सपो मार्ट में चल रहे 12 दिवसीय कॉप -14 कॉन्फ्रेंस की बैठक को संबोधित करने पहुंचे थे। इस मौके पर उन्होंने कहा कि पर्यावरण और जलवायु, जैव विविधता एवं धरती दोनों को ही प्रभावित करते हैं। यह व्यापक रूप से स्वीकार किया जाता है कि दुनिया जलवायु परिवर्तन के गंभीर दुष्प्रभावों का सामना कर रही है। ऐसे में प्लास्टिक से दूरी धरती सरंक्षण के लिए जरूरी हो जाता है।
जीवों की प्रजातियां खतरे में
पीएम मोदी ने इस संबंध में धरती के जीव जंतुओं पर भी अपनी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि जीवों की प्रजातियों पर भी संकट मंडराने लगा है। हम इन दुष्परिणामों को धरती का तापमान बढ़ने, समुद्र का जलस्तर बढ़ने और बाढ़, तूफान, भूस्खलन जैसी घटनाओं के तौर पर देख रहे हैं। आपको जानकर हैरानी होगी की दुनिया के दो तिहाई देश मरूस्थलीकरण जैसी गंभीर समस्या का समाना कर रहे हैं। हालांकि मुख्य कारण प्लास्टिक का बढना और पेडों का कटना है।
गंभीर जल संकट के दौर से गुजर रही दुनियां
पीएम मोदी ने पेय जल को लेकर भी अपनी चिंता व्यक्त की, उन्होंने अफसोस जताते हुए कहा कि आज दुनिया गंभीर जल संकट के दौर से गुजर रही है। जब हम मरुस्थलीकरण पर बात करते हैं तो जल संकट जैसी समस्या पर भी विचार करना पड़ता है। हमें जमीन को मरुस्थलीकरण से बचाने के लिए जल संरक्षण पर भी ध्यान देना होगा। हमें इस बात पर ध्यान देना होगा कि धरती के मरुस्थलीकरण से हमारा सतत विकास भी प्रभावित होता है। भारत की संस्कृति में धरती, जल, वायु और पर्यावरण के संरक्षण की संकल्पना मौजूद है। हमें यह बताते हुए खुशी हो रही है कि भारत में साल 2015 से साल 2017 के बीच वनीकरण में 0.8 मिलियन हेक्टेयर की बढोत्तरी हुई है।
प्लास्टिक का बढना पेडों का कटना हो रहा घातक
पीएम मोदी ने कहा कि प्लास्टिक का कचरा भी मरुस्थलीकरण को बढ़ा रहा है। प्लास्टिक का कचरा न केवल स्वास्थ्य का प्रभावित कर रहा है, यह धरती की उर्वरता के लिए भी समस्याएं पैदा कर रहा है, हमारी सरकार ने घोषणा की है कि वह आने वाले कुछ वर्षों के भीतर सिंगल यूज प्लास्टिक का प्रचलन खत्म कर देगी। हम पर्यावरण अनुकूल विकास के लिए प्रतिबद्ध हैं। हम प्लास्टिक के कचरे के निस्तारण पर काम कर रहे हैं। हमें उम्मीद है कि आने वाले वक्त में हम सिंगल यूज प्लास्टिक को अलविदा कह देंगे।
सरकार ने धरती को बचाने के लिए उठाये कई कदम-जावेडकर
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कार्यक्रम में पीएम मोदी के साथ मौजूद केंद्रीय पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि भारत ने बढ़ते मरुस्थलीकरण से धरती को बचाने की दिशा में कई कदम उठाए हैं। पर्यावरण संरक्षण को लेकर भारत ने उल्लेखनीय काम किया है। यही वजह है कि दुनिया के 77 फीसदी बाघ केवल भारत में हैं। भारत ने बढ़ती ग्लोबल वर्मिंग और प्रदूषण से निपटने के लिए टैक्स में छूट देकर ई-वाहनों को भी बढ़ावा दिया है। जावड़ेकर ने दो सितंबर से शुरू हुए इस कार्यक्रम का शुभारंभ किया था। यह संयुक्त राष्ट्र कन्वेंशन टू कॉम्बैट डेजर्टिफिकेशन के तहत अयोजित होने वाला 14वां सम्मेलन है। इसका कार्यक्रम का आयोजन दुनिया को बढ़ते मरुस्थलीकरण से बचाने की मुहिम के तहत किया गया है। इस बार भारत इस कार्यक्रम की मेजबानी कर रहा है।

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