थल सेनाध्यक्ष जनरल नरवाने ने कार्यभार संभालते ही कहा, आतंकवाद के स्त्रोत पर हमलेे का पूर्ण अधिकार

नई दिल्ली। पाकिस्तान को कड़ी चेतावनी देते हुए नए सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवाने ने मंगलवार को कहा कि अगर पड़ोसी देश राज्य प्रायोजित आतंकवाद को नहीं रोकता है तो इस स्थिति में भारत के पास आतंक के स्रोत पर हमला करने का अधिकार है। सेना प्रमुख का कार्यभार संभालने के बाद एक साक्षात्कार में नरवाने ने कहा कि सेना चीन के साथ लगी सीमा के पास युद्धक क्षमता को बढाएगी ताकि वह किसी भी चुनौती से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार रहे। उन्होंने कहा, खतरा उत्तरी और पश्चिमी दोनों ओर से बना हुआ है। पिछले कुछ वर्षों में हम पश्चिमी सीमाओं पर ध्यान दे रहे रहे हैं, जबकि उत्तरी सीमा प्राथमिकता में थोड़ा नीचे थी। एक बार फिर संतुलन बनाने और प्राथमिकताएं तय करने की जरूरत है। भारत की समग्र सुरक्षा चुनौतियों के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि हमने प्राथमिकताओं को फिर से संतुलित करने के तहत पश्चिमी सीमा से उत्तरी सीमा पर ध्यान केंद्रित किया है। सीमा पार के आतंकवाद से मुकाबले पर जनरल नरवाने ने कहा कि हमने पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद के खिलाफ दृढ़ संकल्पित दंडात्मक जवाब की रणनीति बनायी है। सेना प्रमुख ने कहा, अगर पाकिस्तान राज्य प्रायोजित आतंकवाद की अपनी नीति को नहीं रोकता है तो हमारे पास ऐसी स्थिति में आतंक के खतरे वाले स्रोतों पर हमला करने का अधिकार है। निस्संदेह बहुत सारे सुधार हुए हैं। उन्होंने कहा कि पाकिस्तानी सेना की राज्य प्रायोजित आतंकवाद से ध्यान हटाने की सारी कोशिशें नाकाम हो गयी हैं।

पाकिस्तान में प्रायोजित आतंकवाद

आतंकवादियों के सफाए और आतंकी नेटवर्क की तबाही के कारण पाकिस्तानी सेना के युद्ध की मंशा को झटका लगा है । पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद के मुद्दे से वह कैसे निपटेंगे, इस बारे में उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के उकसावे या उसके द्वारा प्रायोजित आतंकवाद के किसी भी कृत्य का जवाब देने के लिए हमारे पास कई सारे विकल्प हैं। नियंत्रण रेखा (एलओसी) पर संघर्षविराम उल्लंघन की बढ़ती घटनाओं का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि कश्मीर मुद्दे को जिंदा रखने के लिए ऐसा किया जा रहा है । चीन के साथ लगी सीमा सुरक्षा की चुनौतियों के बारे में बताते हुए जनरल नरवाने ने कहा हम उत्तरी सीमा के पास क्षमता निर्माण में सुधार करना जारी रखेंगे ताकि जरूरत पडऩे पर हम तैयार रहें। उन्होंने कहा, वुहान शिखर सम्मेलन के बाद सीमा के पास अमन-चैन बनाए रखने, मतभेदों को सुलझाने और इसे विवाद का रूप देने से बचने के लिए दोनों देशों ने अपने-अपने बलों के लिए रणनीतिक दिशा-निर्देश जारी किये। उन्होंने कहा कि दिशा-निर्देश का असर वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर दिखा है और विद्यमान मतभेदों, एलएसी को लेकर अलग-अलग समझ और संवेदनशील इलाके में कुछ टकराव के बावजूद दोनों ओर के सैनिकों का रूख सौहार्दपूर्ण है। चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ की नियुक्ति का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि हम समूचे सैन्य तंत्र में जो महत्वपूर्ण सुधार लाना चाहते हैं, सीडीएस निस्संदेह उन बदलावों की राह तैयार करेंगे ।

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