प्रबंधन के गुरूकुल में मैनेजमेंट के गुर सीखने अपने मंत्रीमंडल के साथ आईआईएम लखनऊ पहुंचे मुख्यमंत्री

-लीडरशिप डेवलपमेंट प्रोग्राम प्रदेश के विकास में होंगे सहायक-सीएम योगी
लखनऊ। प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पहली बार रविवार को अपने मंत्रीमंडल के साथ भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम लखनऊ) में विशेषज्ञों से मैनेजमेंट के गुर सीखने पहुंचें। इस दौरान मंत्रियों के लिए पाठशालाएं आयोजित की गयी। 6 सेशन में आयोजित पाठशालाओं ने मंत्रियों ने आईआईएम विशेषज्ञों से कई प्रकार के गुर सीखें। मंत्रियों को विशेषज्ञों ने बताया कि किसी भी संस्थान या सरकार को चलाने के लिए मैनेजमेंट की बेहद आवश्यकता होती है। मैनेजमेंट के साथ-साथ फायदे और नुकसान के बारे मेंं भी बहुत कुछ सोच विचार करना पड़ता है। हम किसी भी कार्य के लिए जब आगे बढ़ते हैं तो उसके लिए मैनेजमेंंट किस तरह का है इस पर विचार जरूर करना चाहिए। उन्होंने बताया कि किसी भी कार्य के लिए यदि मैनेजमेंट सही नहीं है तो कई प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। हमारे नेचर और व्यवहार पर भी मैनेजमेंंट बहुत मायने रखता है। इसके साथ ही मंत्रियों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ सुशासन, नेतृत्व और लोक संवाद के भी गुर सीखे। आईआईएम विशेषज्ञों की ओर से लगायी गयी पाठशाला का नाम मंथन-एक नाम दिया गया था। इस मौके पर उपस्थित मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि लीडरशिप डवलपमेंट प्रोग्राम प्रदेश के समग्र विकास में सहायक होगा। सीखने के लिए जहां कहीं भी अवसर मिले उसका लाभ अवश्य लेना चाहिए। प्रदेश के सर्वांगीण विकास में इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रम सहायक सिद्ध हो सकते हैं।
मनुष्य उम्र भर कुछ न कुछ सीखता रहता है
इससे पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उद्घाटन सत्र में कहा कि मनुष्य ईश्वर की श्रेष्ठतम कृति है। जीवन सीखने के लिए होता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार सुशासन, प्रबंधन, नेतृत्व कौशल व जनभागीदारी को बेहतर ढंग से जानने के लिए आईआईएम संस्थान से सहयोग प्राप्त कर रही है। उन्होंने कहा कि पहली बार किसी राज्य सरकार ने देश में अपने राजनीतिक नेतृत्व की दक्षता के लिए देश के श्रेष्ठ प्रबन्धन संस्थान से प्रशिक्षण लेने का फैसला किया है। उन्होंने कहा कि ये फैसला काफी लाभकारी होगा।
प्रशासनिक अफसर की भी सलाह जरूरी
योगी ने कहा कि मुख्यमंत्री मैं हूं लेकिन जनहित में कार्यो के लिए प्रशासनिक अधिकारी की सलाह भी बेहतर साबित होती है। उन्होंने प्रेरणा ऐप के साथ प्राथमिक विद्यालय में एक प्रशासनिक अधिकारी का बड़ा योगदान बताया। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रशासनिक अधिकारी द्वारा दिए गए सुझावों को प्राथमिक विद्यालयों पर लागू किया। इसका फायदा हुआ। शासन की योजनाओं को जनता तक पहुंचाने में शिक्षण संस्थान महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
भारत की रीढ है हमारा यूपी-अर्चना
इस मौके पर आईआईएम की निदेशक अर्चना शुक्ला ने कहा कि मैनेजमेंट को मजबूत करने के लिए उस पर मंथन जरूरी होता है। काफी सोचविचार कर आगे बढऩे की जरूरत होती है। ऐसे में सबसे देखने वाली बात यह भी है कि मैनेजमेंट कितने मजबूती के स्तर का है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार की ये पहल अच्छी है फिर यूपी भारत की रीढ़ है। उन्होंने कहा कि एक राजनेता से जनता को काफी उम्मीदें होती हैं। इन उम्मीदों को पूरा करने में यह मंथन कार्यक्रम महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। मंथन कार्यक्रम से अमृत निकलेगा।
मंत्री कैसे निभाएं अपनी प्राथमिकताएं
रविवार को सत्र की शुरुआत में मंत्रियों को प्राथमिकताएं तय करने के बारे में बताया गया। इसमें आईआईएम लखनऊ की प्रो.अर्चना शुक्ला, पुष्पेंद्र प्रियदर्शी और निशांत उप्पल ने मंत्रियों का मार्गदर्शन करने में अहम भूमिका निभायी। इसके बाद प्रो.संजय सिंह उन्हें वैश्विक, राष्ट्रीय और राज्य के आर्थिक परिदृश्य की जानकारी दी। कुछ खास संकेतकों पर उप्र की तुलना देश के चार अग्रणी राज्यों से भी की गयी। इसके बाद मंत्रियों को समूहों में बांटकर प्राथमिकताएं तय करने को लेकर संवाद और चर्चा भी आयोजित की गयी।
एक समूह में बैठे छह मंत्री
आईआईएम परिसर में सभी मंत्रियों को अलग-अलग समूहों में बांटा गया। उनके लिए विभिन्न विषयों पर सत्र आयोजित किए गए और उन्हें टास्क भी दिया गया। क्लास रूम जैसे माहौल में वहां राउंड टेबिल लगाई गई थीं। एक-एक समूह में छह-छह मंत्री बैठे। मुख्यमंत्री खुद हर टेबिल पर गए और मंत्रियों को उत्साहित किया।
बस में मंत्रियों के साथ बैठे मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री आवास से रवाना हुई दो बसों में योगी आदित्यनाथ अपने मंत्रियों के साथ बस में बैठकर आईआईएम के लिए रवाना हुए थे। इस दौरान सीएम का सुरक्षा काफिला भी साथ साथ चला। आईआईएम परिसर में पहुंच कर मुख्यमंत्री ने पहले 9.30 बजे लीडरशिप डवलपमेंट प्रोग्राम का उद्घाटन किया। इस कार्यक्रम के तहत 6 अलग-अलग विषयों पर 6 सेशन आयोजित किए गये। मंत्रियों की कार्यकुशलता बढ़ाने व अनुभव दिलाने के लिए यह सत्र अहम होगा। जनता से सीधे संवाद व संपर्क छवि निर्माण आदि पर भी विशेषज्ञ अपनी राय रखेंगे। प्रशिक्षण का दूसरा सत्र 15 सिंतबर को होग।

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