ऐसे तो राजभवन और सीएम आवास के पास बम भी डाले जा सकते हैं?

लखनऊ। विधानसभा, सीएम आवास और बीजेपी दफ्तर व राजभवन के सामने जिस तरह किसानों ने आलू फेंक कर विरोध जताया वह किसानों का अपना तरीका हो सकता है। लेकिन प्रदेश की विधानसभा के सामने जिस तरह किसानों ने ये तमाशा किया और सुरक्षा में मौजूद पुलिस कर्मी सोते रहे उससे विधानसभा , राजभवन, सीएम आवास और बीजेपी दफ्तर की सुरक्षा पर प्रश्नचिन्ह लग गया है। क्योंकि जिस तरह से आलू बिखेरते हुए किसान चले गये कहीं इसी तरह से कोई विस्फोटक समाग्री बिखेरते चला जाता तो क्या होता? फिर तब भी पुलिस को नहीं पता चलता। आलू फेंके जाने की सूचना भले ही पुलिस को नहीं पता चली अगर इसे विधानसभा की सुरक्षा को लेकर देखा जाये तो सुरक्षा कर्मियों की लापरवाही कम नहीं है। ये लापरवाही तब है जब इतनी भारी संख्या में वहां पर पुलिस बल तैैनात रहता है। सवाल यह भी है आलू जिसने भी फेंके क्या सीसी टीवी को खंगालकर प्रदेश सरकार को मामले की जांच नहीं करानी चाहिए?
बीजेपी दफ्तर की भी सुरक्षा पर सवाल
सबसे बड़ी बात ये भी है कि प्रदेश और देश में जिस पार्टी की सरकार है उस भाजपा दफ्तर के सामने भी आलू फेके गये लेकिन पुलिस को भनक नहीं लगी। ऐसे में क्या दफ्तर की सुरक्षा क्या विधानसभा की सुरक्षा सब जगह पुलिस के एलर्ट रहने के दावों के पोल खुल गयी है।
कृषि मंत्री ने कहा है कोई साजिश
हालांकि इस मामले में कृषिमंत्री ने किसी की साजिश बतायी है। कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही का कहना है कि सड़कों पर सड़े आलू फेंके गये हैं। विपक्ष योगी सरकार को बदनाम करने की साजिश कर रहा है।

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