सीएए व एनआरसी के बहाने ध्यान भटका रही भाजपा : अखिलेश

लखनऊ। सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि गरीबों की थाली से प्याज और आलू दूर है और जनता महंगाई को लेकर सरकार को सबक सिखाने के लिए तैयार है। नागरिकता संशोधन कानून और एनआरसी लाकर सरकार जनता का ध्यान भटका रही है और इसके बूते अगला चुनाव लडऩा चाह रही है। कहा, पहले गोरखपुर में 2007 के दंगे के आरोपितों से वसूली हो फिर सीएए का विरोध करने वालों से सरकारी संपत्ति की क्षति की वसूली की जाए।
हसनगंज दुष्कर्म पीडि़ता की मौत के बाद मंगलवार को परिवार से मिलने पहुंचे सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि प्रदेश की सरकार अपराधियों को संरक्षण दे रही है। पीडि़तों को न्याय नहीं मिल रहा है, उन्नाव के बिहार और हसनगंज की घटनाएं इसका प्रमाण हैं। अगर न्याय मिला होता तो दुष्कर्म की शिकार बेटियों को जान नहीं गंवानी पड़ती। पीडि़ता के परिवार को सपा हर हाल में न्याय दिलाने के लिए संघर्ष करेगी। उन्होंने लगभग 20 मिनट तक पीडि़ता के परिवारिक सदस्यों से बात की। परिजनों ने आरोपित को फांसी दिलाने की मांग उठाई और मांग पत्र भी सौंपा। उन्होंने पीडि़ता के परिवार को पांच लाख की आर्थिक सहायता दी। कहा, सरकार से मृतका के परिवार को 25 लाख की आर्थिक सहायता, सुरक्षा और एक सदस्य को नौकरी की मांग करुंगा। सपा अध्यक्ष ने कहा कि उन्नाव में दुष्कर्म पीडि़ता की मौत की असली जिम्मेदार पुलिस है। पुलिस ने अरोपितों को गिरफ्तार न करके बचने का पूरा मौका दिया। पुलिस के नकारात्मक कार्रवाई से व्यथित होकर पीडि़ता ने एसपी कार्यालय के अंदर आत्मदाह का प्रयास किया और सरकार उसे समुचित इलाज भी नहीं दिला पाई, जिससे उसे जान से गंवानी पड़ी। इतनी बड़ी घटना के बाद भी आरोपितों को मदद देने वाले इंसपेक्टर पर कार्रवाई नहीं किया जाना दर्शाता है कि पुलिस की खामियों पर पर्दा डाला जा रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री ने सांसद साक्षी महाराज पर कटाक्ष करते हुए कहा कि वह महाराज नहीं हो सकते। गेरुआ वस्त्रों की ओर इशारा करते हुए कहा कि उसे पहनने से सम्मान नहीं मिलता, कई बार ऐसे वस्त्र धोखा देने के लिए भी पहने जाते हैं। उन्होंने तंज कसा कि योगी का मतलब जो दूसरों का दुख अपना दुख समझे। बेटियां जान दे रहीं हैं और वह उन्हें न्याय नहीं दे पा रहे। उपद्रव के लिए जिम्मेदार लोगों से सरकारी क्षति की वसूली की घोषणा पर पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि 2007 में गोरखपुर में हुए दंगे के आरोपितों से पहले वसूली की जाए, फिर सीएए के मामले में विरोध करने वालों से की जाए। गौरतलब है कि उन्नाव में 16 दिसंबर को एसपी ऑफिस के सामने रेप पीडि़ता ने आग लगाकर आत्महत्या का प्रयास किया था। गंभीर हालत में पीडि़ता को कानपुर रेफर किया गया था। जहां उसकी 21 दिसंबर को मौत हो गई थी। तीन डॉक्टरों के पैनल ने पीडि़ता का पोस्टमार्टम किया था और पोस्टमार्टम की वीडियोग्राफी भी कराई गई थी।
जिसके बाद पीड़िता के शव को 22 दिसम्बर की देर शाम परिजनों ने दफना दिया था। पीडि़ता के साथ दुष्कर्म की वारदात को अंजाम देने वाले आरोपी को हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत मिलने के पीडि़ता आहत थी।

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