बाबा साहब के पोते ने महाराष्ठ्र हिंसा को सही बताया, पत्रकार को बोला तानाशाह

लखनऊ। जब किसी को सताया जायेगा और उसके साथ कुछ गलत होगा और उसे न्याय नहीं मिलेगा तो वह अपना निवारण खुद करेगा। यदि मैं नहीं होता अब तक मुंबई आधी जलकर खाक हो चुकी थी। ये बात बुधवार को एक न्यूज चैनल के डिबेट मे बाबा साहब भीमराव आंबेडकर के पोते प्रकाश आंबेडकर ने कही। उन्होंने पत्रकार रोहित सरदाना के सवाल पर कहा कि महाराष्ट्र में न्याय के लिए हिंसा हुई है वह जायज है। दरअसल प्रकाश आंबेडकर से सवाल इतना था कि हर साल महाराष्ट्र में शौर्य दिवस बड़ी धूमधाम के साथ शंति पूर्वक मनाया जाता था इस बार ऐसा क्या हो गया जो कि हिंसा भड़क गयी। जवाब में प्रकाश आंबेडकर ने कहा कि हम लोगों ने महाराष्ठ्र बंद का ऐलान वापस ले लिया है लेकिन ये बंद हमारी ओर से नहीं था, महाराष्ट्र के अंदर 25० संघठन थे  उनके साथ वामपंथी भी थे। जिन्होंने एक समिति बनायी थी 2०० साल पहले सामाजिक लड़ाई की जीत का जश्न मनाने के लिए कार्यक्रम किया गया था। इस मौके पर उन्होंने हिन्दूवादी संघठन हिन्दू एकता अगाड़ी संघटन
और शिवाजी प्रतिष्ठा पर आरोप लगाते हुए कहा कि इस संघठन के लोगों ने दलित समाज के लोगों को मारापीटा और उनकी बस में तोड़फोड़ की और सामान भी छीन ले गये। जबकि ये सब पुलिस की मौजूदगी में हुआ। उन्होंने ये भी कहा कि जब इस मामले में पुलिस से शिकायत की गयी तो सही तरह से एफआईआर नहीं दर्ज हुई न ही कार्रवाई हुई। जिसके बाद दलित समाज के लोग नाराज हो गये और हंगामा किया। प्रकाश अंबेडकर ने कहा कि जब हम लोगों को इस बारे मेें पता चला तो मंगलवार को एक बैठक बुलायी गयी। जिसमें कुछ संघठनों के साथ निर्णय लिया गया कि बुधवार को महाराष्ट्र बंद रखेंगे।
प्रकाश अंबेडकर से जब ये पूछा गया कि क्या हिंसा सही थी?
तो उन्होंने जवाब देते हुए कहा कि जब जिन लोगों को हिन्दू संघठनों की ओर से मारा पीटा गया और उनका समान लूटा गया उसके बाद जब उन्हें न्याय नहीं मिला तो उन्होंने ऐसा कदम उठाया। पत्रकार ने जब उनसे पूछा कि क्या हिंसा जायज है ? तो उन्होंने अपना साफ जवाब दिया कि जायज इसलिए ठहरा रहा हूं कि पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की जब न्याय नहीं मिला तो हिंसा जायज है। इसका उन्होंने ये भी उदाहरण दिया कि अगर किसी के बेटे के मर्डर हो जायेगा तो वह शांत नहीं बैठेगा। उन्होंने कहा कि मीडिया ने भी पीड़ितों की कोई सुनवाई नहीं की। जब हिंसा भड़की तो मीडिया भी आ गया। उन्होंने कहा कि हम नहीं होते मुबंई आधी जलकर खाक हो चुकी होती।
जब पूछा गया कि हड़ताल वापस लिया कि दुकाने खुलने लगी थी इसलिए आप पीछे हुए?
तो प्रकाश आंबेडकर ने न्यूज एंकर व पत्रकार रोहित सरदाना को तानाशाह तक बोल दिया। उन्होंने रोहित सरदाना से कहा कि दिल्ली में आप बैठे-बैठे तानाशाही मत कीजिए। उन्होंने कहा कि दिल्ली में बैठे-बैठे तनाशाही करना बहुत आसान है।
पुरानी व्यवस्था बदल चुकी है, दुनियादारी खत्म हो चुकी है
प्रकाश आंबेडकर ने ये भी कहा कि कुछ लोग ऐसे हैं जो दुनियादारी कर रहे हैं लेकिन अब ये नहीं चलेगा। अब पुरानी व्यवस्था बदल चुकी है दुनियादारी समाप्त हो चुकी है। ऐसे में वह लोग सुधर जायें तो अच्छा है।

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