एकेटीयू तैयार करेगा महिला कॉलेजों की स्थापना का प्रस्ताव

-इंजीनियरिंग शिक्षा के स्तर में सुधार को लेकर गठित होगी समिति
लखनऊ। डा. एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय एकेटीयू जल्द ही महिला इंजीनियिरिंग कॉलेजों की स्थापना के लिए एक प्रस्ताव तैयार करेगा। इस प्रस्ताव पर फिर शासन अपना निर्णय लेगा, प्रस्ताव के मुताबिक कॉलेजों की स्थापना होती है तो विश्वविद्यालय से संबद्घ कॉलेजों की संख्या बढ़ जायेगी। अभी मौजूदा समय प्रदेश भर में 800 कॉलेज विश्वविद्यालय से संबद्घ हैं। एकेटीयू के अधिकारियों के मुताबिक इस संबंध में पूर्व में प्राविधिक शिक्षा मंत्री कमल रानी की अध्यक्षता में हुई बैठक में भी माहिला कॉलेजों की स्थापना के लिए प्रस्ताव तैयार किए जाने पर चर्चा हो चुकी है। इस संबंध में मंत्री का भी निर्देश है कि जल्द से जल्द प्रस्ताव तैयार किया जाये ताकि अगले सत्र से आगे की प्रक्रिया शुरू हो सके। इसके साथ ही एकेटीयू की ओर से एक जनपद एक उत्पाद योजाना को भी एकेटीयू से संबद्घ कॉलेजों में पढऩे वाले छात्र-छात्राओं से जोडऩे की तैयारी की जा रही है।
शिक्षा में सुधार के लिए गठित होगी कमेटी
राजधानी समेत प्रदेश भर के इंजीनियरिंग संस्थानों में शिक्षा के स्तर में सुधार हो इसके लिए एक कमेटी गठित की जायेगी। ये कमेटी शिक्षा के स्तर के समय-समय परखेगी इसके साथ बेहतर से बेहतर शिक्षा कैसे हो इस पर भी अपनी राय प्रस्तुत करेगी। कमेटी में शामिल सभी सदस्य एकेटीयू की ओर से होने वाली बैठक में अपने अनुभव को भी साझा करेंगे और अपने सुझाव शासन को एक प्रस्ताव के रूप में भेजेंगे। इस कमेटी में देश के प्रमुख आईआईटी, आईआईएम और औद्योगिक जगत के वरिष्ठ शामिल होंगे।
छात्रों की उपस्थिति भी देखेगी कमेटी
गठित होने वाली कमेटी एकेटीयू से संबद्घ कॉलेजों में पढऩे वाले छात्र-छात्राओं की उपस्थिति भी चेक करेगी। एकेटीयू के अधिकारियों के मुताबिक अधिकांश कॉलेजों में छात्रों की उपस्थिति काफी कम रहती है, इस कारण कई बार परीक्षा परिणाम भी खराब होता है। बाद में छात्र तमाम तरह के आरोप लगाकर एकेटीयू का घेराव और प्रदर्शन करते हैं, इस स्थिति से बचने के लिए सबसे पहले कॉलेजों में छात्र-छात्राओं की 90 प्रतिशत उपस्थिति दर्ज करने के लिए व्यवस्था करनी होगी। हालांकि इस संबंध में एकेटीयू ने कॉलेजों को दिशा निर्देश जारी कर दिए हैं कि छात्रों की उपस्थिति के लिए सख्ती की जाये, ताकि छात्र नियमित पढऩे के लिए कॉलेज आये। अधिकारियों के मुताबिक यदि छात्र नियमित पढऩे आयेंगे तो परिणाम भी बेहतर होगा।

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