समायोजन रद्द होने के बाद शिक्षा मित्रों के आधे पद भी नहीं भरे जा सके

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में बीते 25 जुलाई 2017 को शिक्षा मित्रों का सहायक अध्यापक पद से समायोजन रद्द होने के बाद आधे से भी ज्यादा पद नहीं भर जा सके हैं। स्थिति ये है कि सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी तो है ही साथ ही शिक्षा मित्रों की कमी के चलते पढ़ाई व्यवस्था पर भी ज्यादा असर पड़ रहा है। सपा सरकार में 1171 शिक्षा मित्रों का समायोजन सहायक अध्यापक के पद पर हुआ था लेकिन बीजेपी सरकार के आने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने समायोजन रद्द कर दिया था। वहीं सुप्रीम कोर्ट में शिक्षा मित्रों की ओर से दायर याचिका से भी शिक्षा मित्रों को राहत नहीं मिली है, ऐसी स्थिति में सहायक अध्यापक पद पर समयोजन को लेकर शिक्षा मित्रों की उम्मीद अब टूट चुकी है। आदर्श शिक्षामित्र वेलफेयल एसोसिएशन के संयोजक अमरेंद्र दुबे का कहना है कि सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का अध्ययन किया जा रहा है। नई शिक्षा नीति के तहत भी मानव संसाधन विकास मंत्रालय को ज्ञापन सौंपा गया है।
एससी से समायोजन रद्द होने के बाद दो चरणों में करनी थी नियुक्ति
-पहले चरण में 68500 शिक्षक भर्ती के लिए लिखित परीक्षा मई 2018 में हुई।
– इसमें 5 सितंबर 2018 को नियुक्ति पत्र बांट दिए गए थे।
-68500 शिक्षक भर्ती अभी पूरी नहीं हो सकी है। जबकि 69000 शिक्षक भर्ती के लिए 6 जनवरी को परीक्षा हुई।
-इसमें भी कटऑफ विवाद के कारण प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी है।
शिक्षा मित्रों को अभी मानदेय मिल रहा है दस हजार
पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के कार्यकाल में पूरे प्रदेश में 1.76 लाख शिक्षामित्रों का दो चरणों में शिक्षक पद पर समायोजन हुआ था। इनमें वाराणसी में पहले चरण में 541 और दूसरे चरण में 630 अर्थात दो चरणों में 1171 शिक्षमित्रों का चयन हुआ था। करीब एक वर्ष बतौर शिक्षक पढ़ाने के बाद सर्वोच्च न्यायालय ने इनका समायोजन रद कर दिया। इस पर काफी बवाल मचा था। प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने के बाद उन्होंने फिर हड़ताल की। पूरे प्रदेश में धरना- प्रदर्शन हुआ। तब उनका मानदेय बढ़ा कर दस हजार कर दिया गया।

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