आखिरकार कसा निजी स्कूलों पर शिकंजा, अब जारी हुआ ये फरमान

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-2० हजार से अधिक फीस वसूली तो कार्रवाई होना तय
लखनऊ। राजधानी समेत प्रदेश भर निजी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के अभिभावकों को योगी सरकार ने राहत दी है। निजी स्कूल प्रबंधकों को आदेश जारी करते हुए योगी सरकार ने कहा कि 2० हजार रुपए से अधिक फीस वार्षिक कोई नहीं वसूल सकेगा। यह नियम केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, यूपी माध्यमिक शिक्षा बोर्ड और इंडियन सर्टिफिकेट ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन से संबद्ध वित्तविहीन स्कूलों पर लागू होगा। आदेश के मुताबिक अधिकतम 5 फीसदी फीस ही बढ़ा स्कूल प्रबंधन बढ़ा सकेंगे। माध्यमिक शिक्षा विभाग के निदेशक अवध नरेश शर्मा ने इंडिया न्यूज टाइम्स डॉट इन को बताया कि इसे मुख्यमंत्री के सामाने पेश कर दिया जायेगा। योजना के अनुसार, 2० हजार रुपये से अधिक फीस वसूलने वाले स्कूलों में कक्षा के अनुसार फीस निर्धारित की जाएगी। यही नहीं, किताबों, यूनिफार्म और सह शैक्षणिक गतिविधियों के नाम पर वसूली जाने वाली राशि को भी नियंत्रित कराया जाएगा। योजना के अनुसार वित्तविहीन स्कूल प्रति वर्ष अध्यापकों की वेतन वृद्धि के अनुपात में ही फीस बढ़ा सकेंगे। कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स के अनुसार विद्यालय अधिकतम 5 फीसदी ही फीस बढ़ा सकेंगे।
डीएम और मंडलायुवक्त से कर सकेंगे स्कूल प्रबंधकों की मनमानी की शिकायत
निजी स्कूलों की मनमानी फीस वसूली के मंडल आयुक्त और जिले के डीएम से की जा सकेगी। हालांकि मंडल आयुक्त की अध्यक्षता में गठित कमेटी शिकायत की जांच करेगी और दोषी पाए जाने पर स्कूल पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगेगा। साथ ही वसूली गई अधिक फीस लौटानी होगी। दूसरी बार दोषी पाए जाने पर फीस लौटाने के साथ स्कूल पर पांच लाख रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। तीसरी बार दोषी पाए जाने पर स्कूल पर पांच लाख रुपये का जुर्माना लगाने के साथ उनकी मान्यता रद्द करने के लिए संबंधित बोर्ड से सिफारिश की जाएगी।

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