74 साल बाद मिली यूपी पुलिस के सिपाहियों को राहत, हल्का होगा कंधे का बोझ, अपराधियों की खैर नहीं

न्यूज डेस्क। यूपी पुलिस में जनता की सुरक्षा में सबसे अहम भूमिका निभाने वाले सिपाहियो के कंधो का बोझ हल्का हो जायेगा। पिछले 74 सालों से अपने कंधो पर रायफल का बोझ उठा रहे सिपाहियों को अब इससे मुक्ति मिल जायेगी, और उनको इससे हल्का असलहा इंसास दिया जायेगा, जिससे सिपाही गश्त के दौरान रिलैक्स होकर अपनी ड्यूटी कर सकेंगे। पुलिस महकमें में इस निर्णय के बाद सिपाहियों को बीट पर अपराधियों को दौड़ाकर पकडऩे में आसानी होगी। अभी तक कई सिपाहियों में ये चर्चा होती रही है कि हाथ में भारी भरकम रायफल लेकर भागने में असहजता होती थी, कई मामलो में यह भी देखा जा चुका है कि भागते हुए अपराधी को पकडऩे के लिए रायफल के रहते सिपाही को काफी ध्यान देना पड़ता था। अब सिपाही चिंता मुक्त होकर अपनी ड्यूटी कर सकेंगे।
अंगे्रजो के जमाने से हो हो रहा था इस्तेमाल
यूपी के पुलिस विभाग में दर्ज रिकार्ड के मुताबिक विभाग के सिपाही रायफल का बोझ 1945 से उठा रहे हैं। अब से हटाये जाने का निर्णय 74 सालो बाद हुआ है। हालांकि जिस समय पुलिस को यह मिली थी उस समय बताया जाता है कि कम वजन वाले हाइटेक असलहे नहीं हुआ करते थे, ऐसी स्थिति में कई बार बदमाशों से मुठभेड़ में रायफल की भूमिका काफी अधिक रही है। इस प्वॉइंट थ्री नॉट थ्री रायफल के बाहर होने से सिपाही भी इस निर्णय की प्रशंसा कर रहे हैं।
प्रदेश में कुल 58 हजार 853 रायफल्स का होता है इस्तेमाल
बता दें मौजूदा समय में यूपी पुलिस के पास एक लाख 22 हजार असलहे हैं, इसमें थ्री नॉट थ्री की रायफल की संख्या 58 हजार 853 है। अब इन रायफलों को जमा कराने का काम भी शुरू कर दिया गया है। बताया जा रहा है कि लखनऊ के पुलिस लाइन में इनको जमा कराने के इनका निस्तारण करने का निर्णय बाद में लिया जायेगा। यूपी पुलिस के पास मौजूद असलहों की असल संख्या का पता वर्ष 2016 में कैग की ओर से किए गए सर्वे के बाद पता चली थी।
1995 में ही थी हटाने की तैयारी
पुलिस विभाग के वरिष्ठï अधिकारियों की माने तो इसका चलन 1995 में ही बंद होना थ लेकिन किसी कारण से इसे हटाया नहीं जा सका था। एक सर्वे के मुताबिक 48 फीसद पुलिसकर्मी अभी भी इसे लेकर चलते हैं। कैग ने कुल 15 जिलों में सर्वे किया था, जिनमें राजधानी भी शामिल है। कैग ने कुशीनगर, देवरिया, प्रयागराज, प्रतापगढ़, सीतापुर, गाजियाबाद, मुरादाबाद, मथुरा, झांसी, कानपुर नगर, मेरठ, शाहजहांपुर, आगरा और सोनभद्र जिले में निरीक्षण किया था। भारत में यह प्रथम विश्व युद्ध से प्रचलन में अधिक आयी थी।
समय के मुताबिक थ्र्री नॉट थ्री में ये है कमी
जिस थ्री नॉट थ्री रायफल को हटाने की तैयारी हो चुकी है उसमें वर्तमान समय को देखते हुए काफी कमी है, पहली बात ये वजन भारी है। सुरक्षा की द़ष्टिï से सिपाही कहीं इसे रख नहीं सकते थे ऐसे में उन्हे इसका बोझ कंधे पर ही उठाना पड़ता था या फिर हाथ में ही ड्यूटी के दौरान पकडऩा पड़ता था। थ्री नॉट थ्री की लंबाई 44.5 इंच है, जिसमें बैरल की लंबाई 25 इंच होती है।
अब इंसास निभायेगी साथ, ये है खासियत
बताया जा रहा है थ्री नॉट थ्री रायफल की अपेक्षा इंसास काफी हद तक हल्की है, इंसास के बैरल की लंबाई 18.3 है जबकि लंबाई 37.8 इंच है। जो हल्की है। इसे सिपाही आसानी से लेकर चल सकेंगे, बताया जा रहा है बीट पर यदि अपराधी को दौड़ाकर भी पकडऩा है तो इसे लेकर भागने में आसानी होगी। इंसास की मारक क्षमता 400 मीटर बतायी जा रही है। वहीं इंसास की लंबाई तकरीबन 37.8 इंच है। इसके बैरल की लंबाई 18.3 इंच होती है।
रवि गुप्ता

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