लखनऊ विश्वविद्यालय में आयोजित हुआ 63 वां दीक्षांत समारोह, राज्यपाल ने मेधावियों से कहा समाज में पिछड़ों को आगे बढ़ाने में दे अपना योगदान

लखनऊ विश्वविद्यालय में चल रहे शताब्दी समारोह के क्रम में शनिवार को 63वां दीक्षांत समारोह मनाया गया। समारोह में कोरोना वायरस के चलते 15 टॉप मेधावियों को ही डिग्री के साथ मेडल प्रदान किए गये। इस मौके पर राज्यपाल आंनदी बेन पटेल शिवांश मिश्रा को चांसलर गोल्ड मेडल प्रदान किया वहीं सर्वश्रेष्ठ एनसीसी कैडेट के तौर पर रैना शुक्ला को कुलपति स्वर्ण पदक प्रदान किया गया। वहीं लॉकडाउन के दौरान बेहतरीन कार्य करने वाली तेजस्विनी बाजपेई को डॉ. चक्रवर्ती स्वर्ण पदक से नवाजा गया। इससे पहले कार्यक्रम की शुरुआत में कुलपति प्रोफ़ेसर आलोक राय ने विश्वविद्यालय की उपलब्धियों के बारे में विस्तार से बताया। इस दौरान राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने अपने संबोधन में विश्वविद्यालय के शतायु होने पर बधाई दी। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के इस महान विश्वविद्यालय के कुलाधिपति के रूप में उपस्थित होना मेरे लिए गर्व की बात है। राज्यपाल ने नई शिक्षा नीति का जिक्र करते हुए कहा कि इससे शिक्षा के क्षेत्र में व्यापक बदलाव आएगा। उन्होने कहा कि समय के साथ शिक्षा में बदलाव जरूरी भी था। उन्होंने कहा कि मुझे इस बात की प्रसन्नता है कि छात्र में नई शिक्षा नीति में 60 प्रतिशत तक बदलाव विश्वविद्यालय ने अभी से कर दिया है।

समाज के पिछड़ों को आगे बढ़ाये मेधावी—राज्यपाल
राज्यपाल ने कहा विश्वविद्यालय जीवन जीने की कार्यशाला है जितने ही विद्यार्थियों ने आज पदक प्राप्त किए हैं वो समाज के पिछड़ों को आगे बढ़ाने में अपनी भूमिका निभाएं। उन्होंने कहा कि कोराना काल में विश्वविद्यालय ने अपनी सामाजिक जिम्मेदारी निभाई और पढ़ाई का नुकसान न हो इसके लिए ऑनलाइन कक्षाएं भी संचालित की गईं। अनुसंधान के क्षेत्र में लविवि के एमओयू करके शोध के नए अवसर तलाश रहा है। इस अवसर पर उन्होंने पदक विजेताओं को बधाई और शिक्षकों को धन्यवाद दिया।

दीक्षांत का मतलब दीक्षा का अंत नहीं
कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा ने कहा कि दीक्षांत का मतलब दीक्षा का अंत नहीं होता है। इसका अर्थ है कि नए जीवन में प्रवेश करना। यह समारोह शताब्दी वर्ष में हो रहा है इसलिए यह महत्वपूर्ण है। उन्होंन बताया कि लखनऊ विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए 1920 में अधिसूचना जारी की गई थी। यह हमारे लिए प्रसन्नता का विषय है कि हमारे यहां आचार्य नरेंद्र देव, राधा कमल मुखर्जी जैसे लोग पढ़कर निकले हैं। यहां पढ़ने वाले छात्रों में 14 पदमश्री, 4 पदमभूषण और दो पदम विभूषण से सम्मानित हो चुके हैं।

1920 में विश्वविद्यालय को दर्जा
उप मुख्यमंत्री ने छात्रों को आचार्य नरेन्द्र देव ने शिक्षा के क्षेत्र में एक नजीर पेश की और कुलपति के रूप में बड़ा योगदान दिया। यहां तक कि अपना आवास भी विद्यार्थियों को रहने के लिए दे दिया। उन्होंने बताया कि 1864 में कैनिंग कॉलेज की स्थापना हुई थी इसे ही 1920 में विश्वविद्यालय का दर्जा दिया गया। उन्होंने कहा कि लविवि में ऑनलाइन पठन पाठन की व्यवस्था की गई है। 11760 ई कंटेंट भी लविवि ने प्रदेश को उपलब्ध कराए हैं।

सचिन ने बताया विश्वविद्यालय का शून्य से 100 तक इतिहास
राजधानी के वरिष्ठ पत्रकार सचिन त्रिपाठी ने शून्य से 100 तक पुस्तक लिखकर लोगों को लखनऊ विश्वविद्यालय के इतिहास से रूबरू कराया। इस पुस्तक का विमोचन भी राज्यपाल व उप मुख्यमंत्री ने दीक्षांत समारोह के मौके पर किया। पुस्तक लिखने वाले सचिन कहते हैं लखनऊ विश्वविद्यालय सिर्फ एक शिक्षण संस्थान नहीं है। लखनऊ का इतिहास लखनऊ विश्वविद्यालय के इतिहास के बिना अधूरा है। यह लखनऊ की गंगा-जमुनी तहजीब का प्रतीक भी है। इसे अवध के हिन्दू और मुस्लिम ताल्लुकेदार ने चंदा जमा करके स्थापित किया था। इसकी स्थापना से जुड़े तमाम किस्से और तथ्य हैं। इनको प्रामाणिक दस्तावेज के माध्यम से पुस्तक- लखनऊ विश्वविद्यालय शून्य से 100 तक, में शामिल किया गया है।

इन्हें मेडल के साथ मिली डिग्री
—शिवांश मिश्रा- गोल्ड
—तेजस्विनी बाजपेई- गोल्ड
—रैना शुक्ला- गोल्ड
—हर्षिता दुबे- दो रजत
—विदिशा भुक्ता- ब्रॉन्ज
——ज्योति सिंह- ब्रॉन्ज
—पलक मिश्रा- ब्रॉन्ज
—सोनिया गुप्ता- ब्रॉन्ज
—आदित्य सिंह- ब्रॉन्ज
—शिखर श्रीवास्तव- ब्रॉन्ज
—मारिया खातून- ब्रॉन्ज
—मो. आमिर- ब्रॉन्ज
—अभय द्विवेदी- ब्रॉन्ज
— सनातन संकल्प- ब्रॉन्ज